Chhattisgarh Bhugaarbhik Sanrchana | छत्तीसगढ़ : भू-गर्भिक संरचना एवं शैल समूह की पूरी जानकारी Hindi में

छत्तीसगढ़ : भू-गर्भिक संरचना - हेल्लो दोस्तों, आज की इस लेख में हम आपको छत्तीसगढ़ के भू-गर्भिक संरचना के बारे में  जानकारी देंगे, जोकि छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाली सभी Exams के लिए बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण साबित होगी | तो दोस्तों हमारे लेख को अंत तक जरुर पढ़े ताकि आपको पूरी जानकारी मिल सके |

Chhattisgarh Bhugaarbhik Sanrchana | छत्तीसगढ़ : भू-गर्भिक संरचना पूरी जानकारी Hindi में

छत्तीसगढ़ : भू-गर्भिक संरचना -

किसी क्षेत्र की भू-गर्भिक संरचना से उस क्षेत्र की मिट्टी, खनिजों की उपलब्धता, वनों की विविधता एवं कृषि योग्य भूमि का अभिन्न संबंध है. छत्तीसगढ़ की भू-संरचना में आर्कियन शैल समूह, कड़प्पा एवं गोंडवाना शैल समूहों का मुख्य योगदान है, इसके अतिरिक्त धारवाड़ एवं दक्कन ट्रेप, लेटेराइट, एलूवियम, रायोलाईट, फल्साईट आदि शैल समूहों का भी यहाँ विस्तार पाया जाता है. जो निम्नानुसार हैं -

  1. आर्कियन युग (आघ महाकल्प )शैल समूह 
  2. धारवाड़ शैल समूह 
  3. कड़प्पा शैल समुह 
  4. विंध्यन शैल समूह 
  5. प्री कैम्ब्रियन शैल समूह 
  6. गोंडवाना शैल समूह 
  7. दक्कन ट्रेप एवं लमेटा 
  8. लैटेराइट शैल समूह 
  9. जलोढ़ शैल समूह
Chhattisgarh Bhugaarbhik Sanrchana

आद्यमहाकल्प या आर्कियन युग के शैल समूह -

  • यह पृथ्वी की प्राचीनतम् एवं कठोर चट्टान है. यह सबसे गहराई में पाई जाती है. ये चट्टानें मुख्यतः लावा के ठंडा होने से निर्मित जीवांश रहित चट्टानें हैं. इन चट्टानों के अपरदन (Erosion) से हल्की रेतीली मिट्टी बनती है जो कृषि कार्य हेतु बहुत उपजाऊ नहीं होती पर मोटे अनाजों (Millets) के लिये उपयुक्त है..
  • इस शैल समूह का विस्तार सरगुजा संभाग के चांगभखार क्षेत्र से नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ की पहाड़ियों के मध्य छत्तीसगढ़ के लगभग 50% भाग में है. छत्तीसगढ़ में आर्कियन युग की प्रमुख चट्टान ग्रेनाइट, शिस्ट आदि हैं. इन चट्टानों में छत्तीसगढ़ में ग्रेनाइट, फेल्सपार, क्वार्ट्स आदि खनिज पाये जाते हैं.
  • बघेलखण्ड का पठार- अम्बिकापुर क्षेत्र में।
  • जशपुर-सामरी पाट- सामरी, लुण्ड्रा, सीतापुर, जशपुर, बगीचा, कुनकुरी, पत्थलगाँव क्षेत्र में |
  • छत्तीसगढ़ का मैदान- घरघोड़ा (रायगढ़), उत्तर पश्चिम में कोटा, पेण्ड्रा, लोरमी तथा पण्डरिया तहसीलों में एवं दक्षिणी भाग में महासमुंद, राजिम, गरियाबंद, कुरूद, धमतरी, डौण्डीलोहारा, बालोद आदि क्षेत्रों में, दण्डकारण्य पठार- चारामा, भानुप्रतापपुर, कांकेर, कोण्डागाँव, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा |

धारवाड़ शैल समूह -
  • ये जलीय अवसादी चट्टानें हैं जो आर्कियन चट्टानों के अपरदन से निर्मित होती है इसमें जीवांश नहीं होता. इन चट्टानों में स्लेट, क्वार्ट्ज, कांग्लोमेरेट, माइकासिस्ट एवं नीस चट्टानें प्रमुख है. धारवाड़ चट्टानें कृषि के लिए अनुपयुक्त हैं. लौह अयस्क की प्राप्ति मुख्यतः इसी शैल समूह से होती है.
छत्तीसगढ़ की बाह्य सीमा पर चारों ओर धारवाड़ क्रम का विकास है. छत्तीसगढ़ में इसकी 3 सीरिज हैं -
  1. दुर्ग संभाग में चिल्फी घाटी 
  2. रायपुर संभाग में सोनाखान सीरिज
  3. दुर्ग-बस्तर क्षेत्र में लौह अयस्क सीरिज
इस शैल समूह का वितरण निम्नानुसार है - 
  1. बघेलखण्ड - बलरामपुर जिले के रामानुजगंज, वाड्रफनगर
  2. छत्तीसगढ़ का मैदान- कवर्धा, बेमेतरा, बालोद, रायपुर, गरियाबंद, धमतरी, दुर्ग, कसडोल (बलौदाबाजार), पंडरिया (कवर्धा) एवं मुंगेली जिले में. 
  3. दण्डकारण्य- जगदलपुर, भानुप्रतापपुर, दंतेवाड़ा, मोहला (राजनांदगाँव)
कड़प्पा क्रम - 
  • आर्कियन युग की समाप्ति के बाद ग्रेनाइट चट्टानों के अपरदन से कड़प्पा शैल समूह का निर्माण हुआ. पंखाकार आकृति में इन्हीं चट्टानों से छत्तीसगढ़ के मैदान का निर्माण हुआ. यह शैल समूह छत्तीसगढ़ के लगभग 25-30% भू-भाग में फैला हुआ है. कड़प्पा शैल का विस्तार रायगढ़, सारंगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, डभरा, मुंगेली, बिलासपुर, तखतपुर, बलौदाबाजार, बिलाईगढ़, भाटापारा, कसडोल, तिल्दा, दुर्ग, नवागढ़, धमधा, सरायपाली, महासमुंद, भोपालपट्टनम तथा जगदलपुर तहसील में हैं।
  • इसके 2 वर्ग हैं- रायपुर श्रेणी एवं चंद्रपुर श्रेणी
  • इसमें स्लेट, चूना पत्थर, डोलोमाईट एवं क्वार्ट्साइट खनिज पाया जाता है.
  • कड़प्पा समूह में निक्षेपित कछारी मिट्टी धान की खेती के लिये सर्वोत्तम है |
विंध्यन शैल समूह - 
  • कड़प्पा काल के बाद इसका निर्माण हुआ है. इसमें चूना पत्थर, बलुआ पत्थर पाया जाता है. यह चट्टानें रायपुर, बालोद एवं जगदलपुर के कुछ क्षेत्रों में पायी जाती हैं | 
प्रि-कैम्ब्रियन शैल समूह -
  • ज्वालामुखी उद्भेदन से कड़प्पा समूह के दक्षिण-पश्चिम भाग में इसका निर्माण हुआ. यह दुर्ग, बालोद जिला एवं राजनांदगाँव के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है |
लमेटा एवं दक्कन ट्रेप -
  • दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट युक्त लावा से दक्कन ट्रेप शैल समूह बना है. बेसाल्ट चट्टानों के अपरदन से काली मिट्टी का निर्माण होता है, जो उपजाऊ मिट्टी है और रबी फसलों के लिये उपयुक्त है. 
  • प्रदेश में दक्कन ट्रेप मैकल श्रेणी के पूर्वी भाग तक पाया जाता है, इसका विस्तार कोरबा, कवर्धा, सरगुजा, जशपुर आदि क्षेत्रों में है. लमेटा शैल समूह का विस्तार गौरेला के निकट मैकल श्रेणियों के ढाल तक पंडरिया, लोरमी एवं पेण्ड्रा तहसीलों के उत्तर भाग में है | दक्कन ट्रेप में बॉक्साइट के भंडार हैं |
गोंडवाना शैल समूह -
  • नदियों के अवसादों के रूप में युगों से जमे वनस्पति एवं जीवों के अवशेषों से इन चट्टानों का निर्माण हुआ है. छत्तीसगढ़ के लगभग 17 प्रतिशत भाग में गोंडवाना शैल समूह का विस्तार है. महानदी घाटी के साथ-साथ गोंडवाना क्रम की शैल दक्षिण-पूर्व की ओर फैली है. इन चट्टानों में मुख्यत: कोयला पाया जाता है साथ ही लौह अयस्क भी पाया जाता है.
छत्तीसगढ़ में इसके दो क्रम हैं -
  • ऊपरी गोंडवाना शैल-क्रम- जनकपुर, मनेन्द्रगढ़, प्रतापपुर, बैकुण्ठपुर, सूरजपुर आदि में विस्तार. इस क्रम की प्रमुख शैलें कांग्लोमरेट, क्वार्ट्साइट तथा बलुआ पत्थर आदि हैं। जिसमें कोयले की मोटी तह है। 
  • निचली गोंडवाना शैल-क्रम- यह शैल समूह कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ का दक्षिणी भाग, सरगुजा जिले के दक्षिणी भाग, कटघोरा, कोरबा, खरसिया, धरमजयगढ़, रायगढ़ जिले एवं मांड नदी घाट में विस्तृत है। 
  • मध्य गोंडवाना- मध्य गोंडवाना शैल का अधिक विकास छत्तीसगढ़ में प्रायः नहीं हुआ है।
लैटेराइट शैल समूह- 
  • यह दक्कन ट्रेप के क्षरण से बनता है. इसमें फसल उत्पादकता कम होती है रायगढ़, बिलासपुर, जशपुर के कुछ हिस्सों में इसका विस्तार है.
जलोढ़ शैल समूह - 
  • नदी घाटी, नालों के तटों पर यह पाई जाती हैं. छत्तीसगढ़ के बहुत कम हिस्से में इसका विस्तार है विशेषकर सरगुजा एवं जशपुर जिले के कुछ भाग में |
छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना विभिन्न युग की शैलों से निर्मित है जो आर्कियन युग से आधुनिक युग तक की हैं. उपरोक्त प्रमुख शैल समूहों के अतिरिक्त प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में रायोलाईट, फेल्साईट चट्टानों का समूह भी पाया जाता है. इन शैल समूहों ने छत्तीसगढ़ को खनिज के मामले में समृद्ध बनाया है |

छत्तीसगढ़ की भूगर्भिक संरचना एवं शैल समूह एक नजर में -

1. आर्कियन युग या आद्य-महाकल्प -
  • विस्तार -  50% 
  • विशेष - छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक क्षेत्र में विस्तृत प्राचीनतम एवं कठोर शैल समूह
2. धारवाड़ शैल समूह -
  • खनिज - लौह अयस्क
  • राज्य में 3 सीरिज - दुर्ग-बस्तर लौह अयस्क क्षेत्र, चिल्फी घाटी, सोनाखान 
3. कड़प्पा क्रम -
  • विस्तार - 25%-30% 
  • खनिज - चूना पत्थर, डोलोमाइट 
  • अन्य : इन्हीं चट्टानों से पंखाकार आकृति में छत्तीसगढ़ मैदान का निर्माण 
4. विंध्यन शैल समूह -
  • विस्तार - रायपुर, बालोद, जगदलपुर
  • खनिज - चूना पत्थर, बलुआ पत्थर 
5. प्रि-कैम्ब्रियन शैल समूह -
  • विस्तार - दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव
  • अन्य : ज्वालामुखी उद्भेदन से निर्मित 
6. दक्कन ट्रेप एवं लमेटा शैल - 
  • विस्तार : मुख्यत: मैकल श्रेणी का पूर्वी भाग 
  • खनिज - बाक्साइट 
  • अन्य : दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट युक्त लावा से निर्मित बेसाल्ट के अपरदन से काली मिट्टी का निर्माण हुआ है |
7. गोंडवाना शैल समूह -
  • विस्तार: 17% 
  • खनिज - कोयला

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